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भारत में कागज उद्योग - प्रादुर्भाव समस्यायें एवं समाधान


ISBN : 81-85936-64-1
Price : INR 345/-

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भारत में कागज उद्योग - प्रादुर्भाव समस्यायें एवं समाधान

About Book - किसी देश में कागज का उपभोग अर्थव्यवस्था के विकास के स्तर के साथ-साथ लोगों के रहन-सहन का सूचक है। एशिया में कागज का कुल औसत प्रयोग 18 किग्रा0 और विकासशील देशों में 150 से 250 किग्रा0 होने की अपेक्षा भारत में प्रति व्यक्ति कागज का प्रयोग लगभग 3 किग्रा होने का अनुमान है। अमेरिका में प्रतिव्यक्ति कागज का उपयोग लगभग 330 किग्रा0 होने का अनुमान है। इसे यह प्रदर्शित होता है कि भारत में कागज उद्योग के विकास की बड़ी सम्भावनाएं हैं। भारत में कागज उद्योग उन दस उद्योगों में से एक है जिनका राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में प्रमुख सथान है। यहां न्यूजप्रिंट की मंाग में 6 से 8ः की स्थिर वृद्धि हुई है। यहां केवल 30ः न्यूजप्रिंट का ही आयात किया गया है। जिससे धरेलू उत्पादन/बाजार को प्रोत्साहन मिला है।
हाल ही में भारतीय कागज उद्योग को कठिनाई के दौर से गुजरना पड़ रहा हैं वर्ष 1995 से1999 की अवधि के दौरान निवेश लागत बढ़ने और माल की मूल्य वसूली में कमी आने के कारण आयात में वृद्धि हुई। आज कागज उद्योग के संयं.ों और मशीनों के तुरंत आधुनिकीकरण की आवश्यकता है। कुछ इकाइयों में लगी मशीनें 50 से 60 वर्ष पुरानी हैं, विद्युत आपूर्ति अनियमित है और परिवहन लागत बढ़ती जा रही है। इन परिस्थितियों में कागज की छोटी इकाइयां विशेष रूप से भयंकर खतरें में है। और उनका टिके रहना भी कठिन होता जा रहा हैं।
वर्ष 1970 के पूर्व और वर्ष 1995 को छोड़कर कागज उद्योग के खमता उपभोग का स्तर 50 से 60ः ही रहा है। कमक्षमता उपभोग होने के कारण भी काफी मिले बंद होती जा रही हैं।
लेखक ने कागज उद्योग की वृद्धि और विकास का गहराई से अध्ययन किया है और उनके द्वारा वर्तमान में आ रही समस्याओं कस विश्लेषण भी किया गया है। कागज उद्योग कोऔर अधिक सक्षम एवं मजबूत बनाने के उद्देश्य से लेखक द्वारा अनेक उपाय भी सुझाए गए हैं। भारत में कागज उद्योग को ठोस आधार प्रदान करने के लिए लेखक ने कागज उद्योग के सम्बन्ध में एक राष्ट्रीय नीति तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
यह पुस्तक भारत में कागज उद्योग से समबन्धित उपलब्ध वर्तमान अत्पल्प साहित्य मे वृद्धि करने का एक सतुत्य प्रयास एवं अभिनव प्रयोग है।

 

About Author - डा. दिनेश शर्मा ने एम.काम. , डी.पी.ए. और पी.एच.डी. की उपाधि लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है। वे लगातार प्रथम श्रेणी मे उत्तीर्ण होते रहे है। अध्यापक के रूप में अपने कैरियर के साथ-साथ इन्होंने राज्य व केनद्र सरकार सहित विभिन्न संगठनों के कई महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया है।
डा. शर्मा ने तीन वर्षों तक उ.प्र. पर्यटन विकास निगम के वाइसचेयर मैन (स्तर राज्यमंत्री) के रूप में कार्य किया। वर्तमान में वे प्रािम एफ्रो ऐशियन गेम्स की वित्तीय समिति, के वाइसचेयर मैन, हिंदुस्तान सकाउट्स और गाइड्स उ.प्र. के चेयरमैन और उ.प्र.त्र नौकायन एशोसिएशन (भारतीय गैरओलम्पिक एशोसिएशन) के अध्यक्ष है। यह राष्ट्रीय युवा आयोग, भारत सरकार के सदस्य, राष्ट्र पुर्न निर्माण वाहिनी, नेहरू युवा केन्द्र भारत सरकार की स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य और लाल बहादुर नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फिजिकल एजूकेशन, ग्वालियर के एकेडेमिक काउन्सिल के सदस्य है।
डा0 शर्मा की अगली आने वाली पुस्तक ''व्यावसायिक संगठन एवं प्रबन्ध'', भारत में पर्यटन उद्योग की सम्भावनायें, तथा उ0 प्र0 के विशेश संदर्भ में भारतीय हस्तनिर्मित कागज उद्योग-समस्यायें एवं समाधान है। इसके पूर्व आपकी पुस्तक "Strategy of Development of Paper Industry in India" का प्रकाशन हो चुका है।


ISBN : 81-85936-64-1
Price : INR 345/-